आस्था को भावनाएं चाहिये. : आस्था को भावनाएं चाहिये
बड़वाह। दो चक्री दस कामकुम...: आस्था को भावनाएं चाहिये बड़वाह। दो चक्री दस कामकुमारों की मोक्ष स्थली सिद्दवरकूट में मुख बधिर एवं दृष्टि बाधित आवासीय विद्यालय के बच्चों न...
Controversial Photo of Lord Ganesh.
Sunday, 16 October 2016
Tuesday, 13 September 2016
श्रीगणेश के साथ ऐसा क्यों?
श्रीगणेश के साथ ऐसा क्यों?
अजय श्रीवास्तव
इंदौर की दि राजकुमार मिल सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति द्वारा गणेश जी की स्थापना की गई है. यहां होने वाले कार्यक्रम ( जिसका निमंत्रण पत्र सभी प्रमुख समाचार पत्रों में दिया गया है) में इंदौर शहर के सभी प्रमुख दलों के लोग शिरकत करने वाले हैं. इस समिति के अध्यक्ष कैलाश ठाकुर और उपाध्यक्ष गौरीशंकर चौकसे जी है. इस कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में भगवान गणेश जी की एक मोहक तस्वीर लगाई गई है जिसमें वो लक्ष्मी जी के साथ हैं।
ये फोटो यूं तो सुंदर है पर ये बिलकुल गलत और धर्मद्रोही है. इस फोटो में माता लक्ष्मी को गणेशजी के वाम (उल्टे हाथ की) जंघा पर विराजमान बताया गया है. वाम क्षेत्र पत्नी का बताया गया है और वाम जंघा पर केवल और केवल पत्नी ही बैठ सकती है और माता लक्ष्मी श्रीगणेश की पत्नी नहीं माता हैं. कुछ लोग लक्ष्मी को श्रीगणेश की बहन भी बताते हैं इस पक्ष से देखा जाए तो ये फोटो पूरी तरह से गलत है. माता लक्ष्मी विष्णु जी की वाम जंघा पर बैठती है और नृसिंह की भी वाम जंघा पर आपको विराजमान बताया जाता है. लक्ष्मी विष्णु जी की पत्नी हैं इसलिए वो उनकी वाम जंघा पर विराजमान हो सकती हैं पर वो श्रीगणेश जी की वाम जंघा पर कैसे बैठ सकती हैं? यहां तो श्रीगणेश और माता लक्ष्मी का रिश्ता ही बिगाड़ दिया गया.......
प्रकट रूप से ये बिलकुल गलत है. अगर इस बात की जानकारी किसी को नहीं थी तो ऐसी फोटो दी ही नहीं जानी चाहिये थी. ये गलती किसकी है ये तो नहीं मालूम पर धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करने वालों से इस बात की आशा तो अवश्य ही की जा सकती है कि वो ऐसी (अज्ञान रूप से ही होने वाली) धर्मद्रोही गलती से बचेंगे.
वैसे भी भगवान श्रीगणेश को आजकल भगवान की श्रेणी से निकालकर एक प्रतीक बना दिया गया है जो जैसा चाहे उनको दिखा सकता है कहीं ऐसा न हो कि एक दिन परिवार कल्याण वाले उनको परिवार नियंत्रण का संदेश देने वाले रूप में प्रस्तुत कर डालें. आपको बता दें कि भगवान श्रीगणेश जी का मनमाना रूप परिवर्तन करने के विरूद्ध ज्योतिष अपना मत व्यक्त कर चुके हैं अब कहां हैं धर्म की और धर्म रक्षा कीबातें करने वाले संत, शंकराचार्य और महामंडलेश्वर. अब आपके सामने है पूरा प्रकरण आप विचार करें क्या सही है और क्या गलत कौन धर्म की रक्षा कर रहा है कौन क्षय....... लिखने को बहुत कुछ है पर समय और स्थान का अभाव है...आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार करें.......
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